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title: "शाम की दुआ और मग़रिब के बाद के अज़कार | Global Prayer Times"
description: "मग़रिब या इशा के बाद शाम की दुआ — «अम्सैना», तीन क़ुल, और रात की हिफ़ाज़त के अज़कार। भारतीय मोहल्लों में परिवार के साथ पढ़ने की परंपरा।"
url: https://globalprayertimes.org/blog/in-shaam-dua-hindi/
source: Global Prayer Times
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# शाम की दुआ और मग़रिब के बाद के अज़कार | Global Prayer Times

मग़रिब या इशा के बाद शाम की दुआ — «अम्सैना», तीन क़ुल, और रात की हिफ़ाज़त के अज़कार। भारतीय मोहल्लों में परिवार के साथ पढ़ने की परंपरा।

Daily Duas · 2nd June 2026 · 8 min read · Global Prayer Times — भारत 

 शाम की दुआ और मग़रिब के बाद के अज़कार 

 मग़रिब या इशा के बाद शाम की दुआ — «अम्सैना», तीन क़ुल, और रात की हिफ़ाज़त के अज़कार। भारतीय मोहल्लों में परिवार के साथ पढ़ने की परंपरा।

 Quick Answer मग़रिब या इशा के बाद शाम की दुआ — «अम्सैना», तीन क़ुल, और रात की हिफ़ाज़त के अज़कार। भारतीय मोहल्लों में परिवार के साथ पढ़ने की परंपरा। भारत के कई घरों में मग़रिब की अज़ान के बाद बच्चे-बड़े एक जगह बैठकर शाम के अज़कार पढ़ते हैं। — Global Prayer Times.

 

 भारत के कई घरों में मग़रिब की अज़ान के बाद बच्चे-बड़े एक जगह बैठकर शाम के अज़कार पढ़ते हैं। हैदराबाद के पुराने इलाक़ों में, मुंबई की मोहल्ला मस्जिदों में — यह आदत न सिर्फ़ हिफ़ाज़त लाती है, बल्कि घर को शांत और जुड़ा हुआ रखती है।

 शाम का मुख्य अज़कार

 أَمْسَيْنَا وَأَمْسَى الْمُلْكُ لِلَّهِ، وَالْحَمْدُ لِلَّهِ، لَا إِلَٰهَ إِلَّا اللَّهُ وَحْدَهُ لَا شَرِيكَ لَهُ

 Amsayna wa amsal-mulku lillah, walhamdu lillah, la ilaha illallahu wahdahu la sharika lah

 हमने शाम की और सारी बादशाही अल्लाह की है; सारी तारीफ़ अल्लाह के लिए; अल्लाह के सिवा कोई माबूद नहीं।

 (मुस्लिम 2723)

 मग़रिब से इशा के बीच क्या पढ़ें?

 तीन क़ुल — इख़लास, फ़लक़, नास — हर एक तीन बार

 «अऊज़ु बि कलिमातिल्लाहित-ताम्माति...» — तीन बार

 आयतुल कुर्सी — एक बार

 सूरह मुल्क (तबारक) — सोने से पहले

 भारत में मग़रिब का वक़्त

 गर्मियों में मग़रिब देर से होती है — मुंबई में कभी-कभी 7:15, दिल्ली में 7:00 के आस-पास। रमज़ान में यही वक़्त इफ़्तार का भी है। अपने शहर का सही वक़्त देखकर शाम के अज़कार को इफ़्तार या इशा से पहले की आदत बनाएँ।

 और अपने रब की ओर रुजू करो और उसके सामने झुक जाओ। — सूरह हज 22:77 परिवार के साथ अदा करें

 लखनऊ की तहज़ीब में «अदब» सिर्फ़ बाहरी नहीं — घर के अंदर भी है। शाम की दुआ को परिवार की मीटिंग बनाएँ: बच्चे अरबी सुनें, बड़े हिंदी अनुवाद समझाएँ। छोटी-छोटी आदतें, बड़ी नेकी बन जाती हैं।

 और पढ़ें

 हैदराबाद नमाज़ के वक़्त 

 रमज़ान गाइड 

 दुआओं का संग्रह 

 

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