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source: Global Prayer Times
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# सुबह की दुआ: दिल्ली-लखनऊ के घरों की बरकत भरी सुबह | GPT

फज्र के बाद सुबह की दुआ और अज़कार — आयतुल कुर्सी, तीन क़ुल, और «अस्बह्ना» — भारतीय मुसलमानों के दिन की रूहानी नींव। दिल्ली, लखनऊ और हैदराबाद की मस्जिदों की

Daily Duas · 1st June 2026 · 9 min read · Global Prayer Times — भारत 

 सुबह की दुआ: दिल्ली-लखनऊ के घरों की बरकत भरी सुबह 

 फज्र के बाद सुबह की दुआ और अज़कार — आयतुल कुर्सी, तीन क़ुल, और «अस्बह्ना» — भारतीय मुसलमानों के दिन की रूहानी नींव। दिल्ली, लखनऊ और हैदराबाद की मस्जिदों की परंपरा के साथ।

 Quick Answer फज्र के बाद सुबह की दुआ और अज़कार — आयतुल कुर्सी, तीन क़ुल, और «अस्बह्ना» — भारतीय मुसलमानों के दिन की रूहानी नींव। दिल्ली, लखनऊ और हैदराबाद की मस्जिदों की परंपरा के साथ। भारत में लाखों मुसलमान हर सुबह फज्र की नमाज़ के बाद कुछ पल अल्लाह से बात करते हैं — यही «सुबह की दुआ». — Global Prayer Times.

 

 भारत में लाखों मुसलमान हर सुबह फज्र की नमाज़ के बाद कुछ पल अल्लाह से बात करते हैं — यही «सुबह की दुआ» है। दिल्ली की जामा मस्जिद से लेकर लखनऊ की पुरानी गलियों तक, यह अदा रोज़मर्रा की ज़िंदगी का हिस्सा है, न कि सिर्फ़ रमज़ान की याद।

 सुबह के अज़कार क्यों पढ़ें?

 हज़रत अबू हुरैरा रज़ि० से रिवायत है कि रसूल अल्लाह ﷺ ने फरमाया: «जो शख़्स सुबह-शाम तीन-तीन बार सूरह इख़लास, फ़लक़ और नास पढ़े, वह हर चीज़ से काफ़ी हो जाएगा।» (बुख़ारी व मुस्लिम)। भारत में दादी-नानी अक्सर बच्चों को यही सिखाती हैं — और यही सिलसिला आगे बढ़ता है।

 أَصْبَحْنَا وَأَصْبَحَ الْمُلْكُ لِلَّهِ، وَالْحَمْदُ لِلَّهِ، لَا إِلَٰهَ إِلَّا اللَّهُ وَحْدَهُ لَا شَرِيكَ لَهُ

 Asbahna wa asbahal-mulku lillah, walhamdu lillah, la ilaha illallahu wahdahu la sharika lah

 हमने सुबह की और सारी बादशाही अल्लाह की है; सारी तारीफ़ अल्लाह के लिए है; अल्लाह के सिवा कोई माबूद नहीं, वह अकेला है, उसका कोई शरीक नहीं।

 (मुस्लिम 2723)

 फज्र के बाद की तरतीब

 फज्र की सुन्नत और फ़र्ज़ नमाज़ अदा करें — अपने शहर का सही वक़्त देखें

 आयतुल कुर्सी (सूरह बकरह 255) एक बार

 सूरह इख़लास, फ़लक़, नास — हर एक तीन बार

 «अस्बह्ना...» और «अल्लाहुम्मा बिका अस्बह्ना...»

 «बिस्मिल्लाहिल-लज़ी ला यज़ुर्रु...» तीन बार — सुबह की हिफ़ाज़त

 भारत में व्यावहारिक सुझाव

 गर्मियों में फज्र जल्दी होती है — दिल्ली में करीब 4:30, मुंबई में 5:15, हैदराबाद में 5:00 बजे के आस-पास। सर्दियों में थोड़ा देर से। फ़ोन पर नोटिफ़िकेशन लगाएँ ताकि नमाज़ के बाद अज़कार का वक़्त न छूटे।

 और अपने रब की याद से दिलों को सुकून मिलता है। — सूरह रअद 13:28 शाम के अज़कार से जोड़

 जो «अस्बह्ना» सुबह पढ़ता है, शाम «अम्सैना» पढ़ता है — यह दिन भर की हिफ़ाज़त का पूरा निज़ाम है। लखनऊ की तहज़ीब की तरह, धीरे-धीरे और दिल से पढ़ें; जल्दबाज़ी में अर्थ खो जाता है।

 और पढ़ें

 दिल्ली नमाज़ के वक़्त 

 दुआओं का संग्रह 

 मुंबई नमाज़ के वक़्त 

 

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— Global Prayer Times. Source: https://globalprayertimes.org/blog/in-subah-ki-dua/
