रमज़ान मोहल्लe के बिना अधूरा लगता है — दादी की सहरी की आवाज़, बच्चों का शोर, मग़रिब पर गली में खजूर और पानी।
मोहल्लe की परंपरा
- गली में खुला इफ़्तार
- राशन उन घरों तक जिनके पास नहीं
- बuज़ुर्गों की इज़्ज़त
- बच्चों को मस्जid भेजना
शहर अलग, दिल एक
दिल्ली की गलियाँ, हैदराबाद की हलीम, मुंबई का तट — हर शहर का अपना रंग, पर मोहब्बत एक जैसी।
नए पड़ोसी
पहली रमज़ान में नए पड़ोसी को इफ़्तार पर बुलाना — इस्लाम का पहला पैग़ाम था: पड़ोसी से प्यार और इज़्ज़त।
मुसलim वह है जिससे उसके हाथ और ज़बान से दूसरे महफ़ूज़ रहें।