रमज़ान की रातें भारत में तरावीह से रोशन होती हैं। दिल्ली की जामा मस्जिद में हज़ारों लोग; छोटे शहरों की मस्जिद में घर जैसा माहौल।
तरावीह कितनी रकअत?
हनफ़ी मज़हब के मुताबिक़ अक्सर बीस रकअत — दो-दो के दस जोड़े। अपने इमाम पर भरोसा रखें।
घर से मस्जिद तक
- इशा के बाद तरावीह
- वुज़ू ताज़ा रखें
- बच्चे पीछे की सफ़ में
- ज़्यादा क़ुरआन सुनना — यही मक़सद
भारत में ख़ास बात
हैदराबाद और लखनऊ की मस्जिदों में तरावीह के बाद सिर्फ़ दुआ — शोर नहीं।
जिसने ईमान के साथ रमज़ान का रोज़ा रखा, उसके पिछले गुनाह माफ़।