चारमीनार के पास मक्कah मस्जिद — पत्थर में मक्कah की मिट्टी की रिवायत; हैदराबाद की पहचान।
इतिहास
मुहम्मद कुली क़ुतुब शाह के दौर — चारमीनार और मस्जिद दोनों शहर की जान हैं।
रमज़ान और जुम्मा
इफ़्तार में हलीम और शर्बत; तरावीह में पूरी बस्ती जमा — लखनऊ जैसी तहज़ीब, आंध्र की गर्मी।
ज़ियारत
लाड़ बाज़ार से गुज़रते हुए मस्जिद — अदब से, जल्दी-जल्दी नहीं।
अल्लाह की मस्जिदें उन लोगों के लिए हैं जो दिन-रात अल्लाह को याद करते हैं।
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