हज्ज इस्लाम का पाँचवाँ रुक्न है। भारत से हज्ज कमेटी के ज़रिए या निजी तौर पर जाते हैं — अरकान समझ लें तो डर कम होता है।
चार अरकान
- इहराम — मीक़ात से
- वुकूफ़-ए-अरफात — 9 ज़िलहज्ज
- तवाफ़-ए-ज़ियारत — काबा के सात चक्कर
- सई — सफ़ा और मरवा
यौम-ए-अरफात
रसूल ﷺ ने फरमाया: «हज्ज अरफात है।» यह दिन दुआ का दिन है — भारतीय हाजी अक्सर अपने परिवार और वतन के लिए रोकर दुआ करते हैं।
गलती हो जाए तो?
कुछ गलतियों का कफ़्फ़ारा (दम) लगता है — तुरंत अपने गाइड या अलिम से पूछें। घबराएँ नहीं; अल्लाह रहम वाला है।
हज्ज के दिन अल्लाह की तरफ़ लौटने वालों से बेहतर दुआ क़बूल होती है।