मक्का और मदीना में हर कदम दुआ का मौक़ा है। भारतीय ज़ायरीन अक्सर पहली बार रो पड़te हैं — यह नर्मी अल्लाह की मेहरबानी है।
तवाफ़ के दौरान
رَبَّنَا آتِنَا فِي الدُّنْيَا حَسَنَةً وَفِي الْآخِرَةِ حَسَنَةً وَقِنَا عَذَابَ النَّارِ
Rabbana atina fid-dunya hasanatan wa fil-akhirati hasanatan wa qina 'adhaban-nar
ऐ हमारे रब! हमें दुनिया में भलाई, आख़िरत में भलाई दे, और आग के अज़ाब से बचा।
(सूरह बकरह 2:201)
मदीना में
नबी ﷺ की मस्जid में अदब से — ज़्यादा शोर न करें, फ़ोटo न लें जहाँ मana ho। दुआ में भारत के परिवार और उम्मत को याद रखें।
सफ़र की दुआ
भारत से वापस आते वक़्त शुक्र अदा करें — घर वालों के लिए खजूर और ज़मज़म लाना खुशी देता है।
दुआ इबादत का मुख्य हिस्सा है।