हर शुक्रवार दोपहर भारत की हज़ारों मस्जिदें भर जाती हैं — जुम्मा मुसलमानों का साप्ताहिक ईद जैसा है। दिल्ली की जामा मस्जिद में लाखों लोग, छोटे कस्बों की मोहल्ला मस्जिद में सैकड़ों — सब एक ख़ुत्बा सुनते, एक साथ दो रकअत नमाज़ पढ़ते हैं।
जुम्मा से पहले
- ग़ुस्ल (पूरा स्नान) — सुन्नत, ख़ासकर गर्मियों में
- अच्छे कपड़े और इत्र — हल्कa
- जल्दी मस्जिद पहुँचें — पहली सफ़ की फ़ज़ीलत
- चार रकअत सुन्नत — ख़ुत्बे से पहले
ख़ुत्बा और नमाज़
इमाम मिम्बर पर ख़ुत्बा देता है — अरबी में, अक्सर उर्दू या स्थानीय भाषा में तर्जुमा। ख़ुत्बे के दौरान बात न करें, न चलें। ख़ुत्बा खत्म होने पर अज़ान, फिर दो रकअत फ़र्ज़ जुम्मा।
ऐ ईमान वालो! जुम्मा के दिन नमाज़ की पुकार सुनते ही अल्लाह की याद की ओर दौड़ो।
भारत में जुम्मा का वक़्त
ज़ुहर का वक़्त शुरू होते ही जुम्मा हो सकती है; अधिकांश मस्जिदें 1:00–1:30 बजे के आस-पास शुरू करती हैं। ऑफ़िस वाले शहरों में — दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु — दोपहर की छुट्टी माँगना आम है।