वुज़ू सिर्फ़ पानी से हाथ-मुँह धोना नहीं — यह नमाज़ की तैयारी है। रसूल अल्लाह ﷺ ने फरमाया: «जो शख़्स बिना वुज़ू के नमाज़ पढ़े, उसकी नमाज़ क़बूल नहीं।» भारत की गर्मियों में पानी की कमी वाले इलाक़ों में भी वुज़ू की पूरी सुन्नत अदा की जा सकती है — थोड़े पानी से, सही तरीक़े से।
वुज़ू की तरतीब
- नीयत और «बिस्मिल्लाह»
- हाथ धोना — कलाई तक, तीन बार
- कुल्ली और नाक में पानी — तीन बार
- चेहरा धोना — तीन बार
- बाएँ हाथ से दाएँ हाथ तक, फिर बाएँ — कलाई तक
- सिर का मसah — एक बार
- कान अंदर-बाहर — एक बार
- पैर — टखने तक, दाएँ से बाएँ — तीन बार
أَشْهَدُ أَنْ لَا إِلَٰهَ إِلَّا اللَّهُ وَحْدَهُ لَا شَرِيكَ لَهُ، وَأَشْهَدُ أَنَّ مُحَمَّدًا عَبْدُهُ وَرَسُولُهُ
Ash-hadu an la ilaha illallahu wahdahu la sharika lah, wa ash-hadu anna Muhammadan 'abduhu wa rasuluh
मैं गवाही देता/देती हूँ कि अल्लाह के सिवा कोई माबूद नहीं, और मुहम्मद ﷺ उसके बंदे और रसूल हैं।
(वुज़ू के बाद की दुआ)
वुज़ू टूटने की सूरतें
पेशाब, शौच, नींद गहरी, या खून-पीप बहने से वुज़ू टूट जाता है। भारत में कई लोग ऑफ़िस में वुज़ू कक्ष इस्तेमाल करते हैं — यह अदब का हिस्सा है; पानी बचाएँ, फर्श गीला न छोड़ें।
तयम्मुम — जब पानी न मिले
सफ़र में, बीमारी में, या पानी न हो तो तयम्मुम (पाक मिट्टी से) जायज़ है। भारत के ग्रामीण इलाक़ों में यह अक्सर ज़रूरी पड़ता है — फ़िकह इसकी इजाज़त देता है।